आप कहीं भी रहें लेकिन कमरा हमेशा आपके साथ रहता है। यही नहीं आप बार-बार अपने कमरे में लौटना चाहते हैं। मेरा कमरा ऐसे ही जाने-माने लेखकों के कमरों की ताक़ीद करता है, जिसमें आप भी सम्मिलित हैं। मेरा कमरा का संपादन किया है, पत्रकार व कहानीकार सुरेश उनियाल ने। मेरा कमरा' सत्रह चुने हुए आलेखों का संकलन है। जिसमें पाठकों को लेखकों के 'अपने कमरे' की झलक मिल सकेगी। मेरा कमरा के पहले भाग में चालीस रचनाकारों को साझा रूप से जोड़ा गया था। मेरा कमरा का ये दूसरा भाग है। संकलन में अधिकांश रचनाकार स्थापित साहित्यकार व पत्रकार हैं। संग्रह में अरुण कुमार असफल, अरुणेंद्र वर्मा,अर्चना चतुर्वेदी,गुरुदीप खुराना,जितेंद्र शर्मा,जिते�... See more
आप कहीं भी रहें लेकिन कमरा हमेशा आपके साथ रहता है। यही नहीं आप बार-बार अपने कमरे में लौटना चाहते हैं। मेरा कमरा ऐसे ही जाने-माने लेखकों के कमरों की ताक़ीद करता है, जिसमें आप भी सम्मिलित हैं। मेरा कमरा का संपादन किया है, पत्रकार व कहानीकार सुरेश उनियाल ने। मेरा कमरा' सत्रह चुने हुए आलेखों का संकलन है। जिसमें पाठकों को लेखकों के 'अपने कमरे' की झलक मिल सकेगी। मेरा कमरा के पहले भाग में चालीस रचनाकारों को साझा रूप से जोड़ा गया था। मेरा कमरा का ये दूसरा भाग है। संकलन में अधिकांश रचनाकार स्थापित साहित्यकार व पत्रकार हैं। संग्रह में अरुण कुमार असफल, अरुणेंद्र वर्मा,अर्चना चतुर्वेदी,गुरुदीप खुराना,जितेंद्र शर्मा,जितेन ठाकुर, दिनेश चंद जोशी, दुर्गाप्रसाद अग्रवाल, पल्लव, प्रेम साहिल, बलराम,महेश दर्पण, राजकमल,विनोद रतूड़ी, सुधांशु गुप्त, सूरज प्रकाश आदि के महत्वपूर्ण लेखकों के आलेख हैं जो बेहद रोचक बन पड़े हैं।