हसीन खान की कविताओं के केंद्रीय सरोकार स्त्री और प्रेम हैं। अर्द्धसामंती-अर्द्धपूंजीवादी पृष्ठभूमि से बने मध्यवर्गीय समाज से आये पुरुषों के चेतन-अवचेतन में पितृसत्तावादी तत्वों के अवशेष प्रभावी ढंग से मौजूद होते हैं। एकाध असमंजसों को छोड़कर कवि का नजरिया प्रगतिशील दिखाई देता है। उसकी मानवीय संवेदना का उज्ज्वल रूप इन कविताओं में दिखाई देता है।... ‘ज़मीन पर उतरी कविता’ कवि का ‘तुम युवा हो’ के बाद दूसरा काव्य संकलन है। ऐसे कविता विरोधी समय में कवि होने की इच्छा से भरे एक युवा का संग्रह। इसका स्वागत करते हुए मैं उम्मीद करता हूं कि वे इस राह पर आगे बढ़ेंगे और अगले संग्रहों में कविता की कठिन रण भूमि में ज्यादा तै�... See more
हसीन खान की कविताओं के केंद्रीय सरोकार स्त्री और प्रेम हैं। अर्द्धसामंती-अर्द्धपूंजीवादी पृष्ठभूमि से बने मध्यवर्गीय समाज से आये पुरुषों के चेतन-अवचेतन में पितृसत्तावादी तत्वों के अवशेष प्रभावी ढंग से मौजूद होते हैं। एकाध असमंजसों को छोड़कर कवि का नजरिया प्रगतिशील दिखाई देता है। उसकी मानवीय संवेदना का उज्ज्वल रूप इन कविताओं में दिखाई देता है।... ‘ज़मीन पर उतरी कविता’ कवि का ‘तुम युवा हो’ के बाद दूसरा काव्य संकलन है। ऐसे कविता विरोधी समय में कवि होने की इच्छा से भरे एक युवा का संग्रह। इसका स्वागत करते हुए मैं उम्मीद करता हूं कि वे इस राह पर आगे बढ़ेंगे और अगले संग्रहों में कविता की कठिन रण भूमि में ज्यादा तैयारी से उतरेंगे। -प्रो- आशीष त्रिपाठी